आजादी से लेकर आजतक भारत में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सांसद मिलाकर करीब 15 हजार से 17000 हजार सांसद देश में बने है ।जो लगातार जीतते आए है । उनको हर बार की जीत की पेंशन मिलती आ रही है। कोई 5 बार सांसद रहा तो उसको 5 बार की पेंशन , वर्तमान ने अगर सांसद है तो उसकी अलग से सैलरी भत्ते फंड यात्राएं दैनिक भत्ते फोन मेडिकल सुविधा सब मिल रही है। देश की जनता का दिया टैक्स कहां जा रहा है कैसे आम जनता के पैसे से नेता लोग मौज मार रहे इतने में भी काम नहीं चलता इनका। तो कमीशन खाते है, घोटाले करते है। अब इनकी संख्या मोदी जी 850 कर रहे है विपक्ष विरोध करे या ना करे ,अब सरकार ने 25% वेतन वृद्धि ओर कर दी है। देष की किसी भी पार्टी ने कोई विरोध हेीं किया। लेकिन जनता को खुलकर विरोध करना चाहिए। क्योंकि इन 850 वीआईपी लोगों का खर्चा आम जनता को उठाना होगा ,वो भी 8 से 10 हजार की नौकरी 12-12 घंटे करके, मंहगा पेट्रोल डीजल, गैस खरीदकर, महंगी बिजली लेकर। सरकार को ये ज्ञात है कि नोएडा यूपी में 12000 सेलरी वाले मजदूरों द्वारा वेतन वृद्धि की मांग करने पर सरकारी अत्याचार, जेल गिरफ्तारी, ठेली, पटड़ी, खोखे लगाने वालों को इसकी कीमत चुकानी होगी।आम जनता पर अत्याचार करने वाली सरकार अपने नेताओं की वेतन वृद्धि सहर्श स्वीकार कर लेती है और कोई पार्टी विरोध नहीं करती । बेसिक सैलरी 1 लाख रुपया -निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 70 हजार रुपया -आफिस खर्च भत्ता 60 हजार रुपया –
दैनिक भत्ता 2000 हजार दिन का । -फर्स्ट क्लास । ट्रेन पूरी तरह फ्री साथ में एक और व्यक्ति भी – 34 फ्री फ्लाइट ट्रिप/साल
परिवार के साथ भी उपयोग कर सकते -सड़क पर चलेंगे तो 16 रुपया प्रति किलोमीटर के हिसाब से मिलेगा
दिल्ली में फ्री सरकारी बंगला/फ्लैट -बिजली-पानी भी काफी हद तक मुफ्त – 3 लैंडलाइन $ 1 मोबाइल
1.5 लाख काल/साल मुफ्त
इंटरनेट भी उपलब्ध
पूरे परिवार का सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज मुफ्त
25000 हजार रुपया पेंशन
2000 हजार एक्स्ट्रा
ल्$ सिक्योरिटी
बिना गारंटी के मोटा लोन
अगर राजनीति सेवा है तो फिर इतनी सैलरी , भत्ते , फंड , यात्राएं , दैनिक भत्ते , मेडिकल सुविधा , ल्$ सिक्योरिटी क्यों ?
ये तो एक सबसे बड़ी नौकरी की तरह हो गई है । जिसके लिए कोई पढ़ाई लिखाई की जरूरत नहीं है, ना ही कोई एग्जाम और टेस्ट देना , चाहे कितने भी अपराधिक मुकदमे लगे हुए हो । कोई दिक्कत नहीं किसी भी प्रकार की , जितने अधिक मुकदमे उतना ही बड़ा नेता इनकी संख्या अब 850 होगी तो कांग्रेस और बीजेपी का कुछ जाना वाला नहीं है इनकी तो मौज होगी उल्टा , पहले बेटे और नातियों को राजनीति में सेट करते आए थे । अब नातिन और बेटियों को भी राजनीति में सेट करने का बढ़िया जुगाड बना दिया है , इनके खर्च जनता को अपनी खून पसीने की कमाई से चुकाने होंगे ।
तो सबसे बड़ा विरोध तो जनता को ही करना चाहिए ना ?



