विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: गाजियाबाद (साहिबाबाद विधानसभा-55)
एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गाजियाबाद आगमन को लेकर प्रशासनिक अमला पलक-पावड़े बिछाए बैठा है, दूसरी तरफ देश की सबसे बड़ी विधानसभाओं में शुमार साहिबाबाद (विधानसभा 55) की जनता नारकीय स्थिति झेलने को मजबूर है। जीटी रोड पर अर्थला मेट्रो स्टेशन और आईटीएस कॉलेज के सामने हल्की सी बारिश ने नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है।
हालत यह है कि सड़क अब सड़क नहीं, बल्कि किसी दरिया का रूप ले चुकी है। स्थानीय लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि प्रशासन ने साहिबाबाद को बिना किसी बजट के ‘नैनीताल’ बना दिया है, जहां गाड़ियां चलने के बजाय तैर रही हैं।
वीआईपी प्रेस कॉन्फ्रेंस का गवाह कॉलेज, बाहर जलभराव का अंबार
विडंबना देखिए, जिस आईटीएस कॉलेज के सभागार में भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेताओं, मंत्रियों और जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की बड़ी-बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस (पीसी) होती हैं, ठीक उसी के बाहर मुख्य सड़क पर घुटनों तक गंदा पानी भरा हुआ है। सत्ता और प्रशासन के दिग्गज जिन रास्तों से गुजरते हैं, वहीं आम जनता रोज़ अपनी जान जोखिम में डालकर चलने को लाचार है।
10 साल से रिकॉर्ड जीत, लेकिन विकास के नाम पर ‘सड़क पर समंदर’
साहिबाबाद विधानसभा से लगातार रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज कर प्रदेश सरकार में मंत्री पद तक पहुंचे सुनील शर्मा के क्षेत्र की यह स्थिति हैरान करने वाली है। जिस जनता ने भारी बहुमत देकर सिर-आंखों पर बिठाया, आज वही जनता जलभराव, जाम और गड्ढों में हिचकोले खा रही है।
लाखों वाहनों की लाइफलाइन ठप: यह सड़क दिल्ली-एनसीआर और यूपी बॉर्डर को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है, जहां से चौबीसों घंटे लाखों वाहन गुजरते हैं। हल्की बारिश के बाद यहां घंटों लंबा जाम लग जाता है और गाड़ियां पानी में बंद होकर खड़ी हो जाती हैं।
आए दिन हादसे और धंसती सड़कें: जलभराव के चलते गहरे गड्ढे छिप जाते हैं। कभी स्कूली बसें फंसती हैं, तो कभी दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए इस रास्ते से गुजरना किसी बुरे सपने से कम नहीं है।
सीएम का रूट चकाचौंध, जनता का रास्ता बदहाल
कल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गाजियाबाद दौरा प्रस्तावित है। शहर में वीआईपी रूट—राजनगर एक्सटेंशन से करहेड़ा और हिंडन एयरपोर्ट के आसपास—युद्धस्तर पर सजावट और मरम्मत की जा रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या मुख्यमंत्री का काफिला कभी साहिबाबाद के इन उपेक्षित इलाकों का रुख करेगा? लखनऊ से मुख्यमंत्री बार-बार संदेश देते हैं कि “जनता की परेशानी सीधे मेरी परेशानी है,” फिर स्थानीय विधायक और प्रशासनिक अफसरों के कानों पर जूं क्यों नहीं रेंग रही?
जनता पूछ रही सवाल: क्या यही है रिकॉर्ड जीत का इनाम?
बार-बार अखबारों में खबरें छपने और सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बावजूद नगर निगम और लोक निर्माण विभाग आंखें मूंदे बैठा है। बुनियादी जल निकासी तक का कोई ठोस इंतजाम 10 वर्षों में नहीं हो सका।
अब साहिबाबाद की त्रस्त जनता खुले तौर पर पूछ रही है—क्या यह दुर्दशा कल मुख्यमंत्री के संज्ञान में आएगी, या फिर वीआईपी स्वागत के चमकते पर्दों के पीछे अर्थला का यह गंदा पानी यूं ही छिपा दिया जाएगा? आगामी चुनावों में जनता इस उपेक्षा का हिसाब मांगेगी या फिर नारकीय सड़कों की यह तस्वीर यूं ही साहिबाबाद की नियति बनी रहेगी?



