सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को इलाहाबाद हाई कोर्ट से ‘दो पैन कार्ड’ मामले में जमानत मिलने के बाद शनिवार (31 अक्टूबर 2026) को जैसे ही रामपुर जेल से रिहा किया गया, ठीक उसी समय प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें जेल के बाहर से हिरासत में ले लिया।
1. समाजवादी पार्टी और विपक्ष का नजरिया (“सरकार डर गई है”)
जेल के बाहर ही आजम खान को गिरफ्तार कर लिया आजम खान के छूटने से यूपी चुनाव एक तरफ सपा के पक्ष में दिखाई देने लगा था जिस प्रकार से आजम खान के हाईकोर्ट द्वारा जमानत लेने एवं दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान की सजा को निलंबित करने के कारण सरकार डर गई थी समाजवादियों का कहना है की कब-कब आते हुए सरकार ने केंद्रीय एजेंटीयों का प्रयोग कर आदम खान को हिरासत में ले लिया है
- राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप: समाजवादी पार्टी (SP) और आजम खान के समर्थकों का सीधा आरोप है कि सरकार आजम खान की राजनीतिक ताकत और उनके जेल से बाहर आने से डरी हुई है। विपक्ष का कहना है कि जब भी आजम खान को अदालत से किसी मामले में राहत या जमानत मिलती है, सरकार उन्हें जेल में बनाए रखने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर कोई नया मामला सामने ले आती है।
- उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए समाजवादी पार्टी इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित मानती है। उनका आरोप है कि विपक्ष को कमजोर करने और उनके बड़े नेताओं को चुनावी प्रक्रिया से दूर रखने के लिए जानबूझकर यह टाइमिंग चुनी गई है।
- केंद्रीय जांच एजेंसियों और पुलिस का स्पष्ट तर्क है कि आजम खान को अदालत से केवल दो पैन कार्ड से जुड़े पुराने मामले में राहत मिली थी। लेकिन 13 अक्टूबर 2026 को उनके खिलाफ रामपुर के अजीमनगर थाने में सरकारी धन के गबन, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़ा एक नया और गंभीर मामला (FIR) दर्ज किया गया था।
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- जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग: ED का कहना है कि यह कार्रवाई मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में कथित रूप से हुए ₹1,170 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) की जांच के तहत की गई है। एजेंसी का पक्ष है कि यह पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया है और भ्रष्टाचार के सबूतों के आधार पर की गई स्वतंत्र कार्रवाई है। [लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी कार्रवाई के पीछे राजनीतिक और कानूनी दोनों पहलू होते हैं। विपक्ष इसे “डरी हुई सरकार की राजनीतिक साजिश” के रूप में देखता है, जबकि सरकार और एजेंसियां इसे “भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई” बताती हैं। यह कार्रवाई कानूनी रूप से कितनी सही है और क्या ED के पास कस्टडी में रखने के पर्याप्त सबूत हैं, इसका अंतिम फैसला केवल अदालत (Court) के जरिए ही तय होगा।
कहने को क्या रह गया है. मुसलमान होने की सजा है.
– रामपुर जेल से बाहर आने के बाद आजम खान.
जेल से बाहर आते ही ED ने आजम खान को हिरासत में ले लिया. pic.twitter.com/dnjwD9oQBO
— Ranvijay Singh (@ranvijaylive) October 31, 2026


