इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि पुलिस द्वारा नागरिकों को बिना वैध प्रक्रिया के अवैध हिरासत में रखना और ‘शांति भंग’ (Shanti Bhang) के नाम पर जेल भेजना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है。
अवैध हिरासत (Illegal Detention) को लेकर हाईकोर्ट के हालिया आदेश और दिशानिर्देशों के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
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- मुआवजे का प्रावधान: कोर्ट ने आदेश दिया है कि किसी भी व्यक्ति को अवैध रूप से 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखने पर प्रतिदिन ₹25,000 का मुआवजा दिया जाना चाहिए。
- दोषी पुलिस अधिकारी से वसूली: अवैध हिरासत के मामलों में दिए जाने वाले जुर्माने की रकम राज्य सरकार दोषी पुलिस अधिकारी या संबंधित कर्मी के वेतन से वसूलेगी。
- सीधे जेल भेजने पर रोक: हाईकोर्ट ने कहा है कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए और व्यक्तिगत बंधपत्र (Personal Bond) देने का पर्याप्त अवसर दिए बिना सीधे जेल भेजना कानून की मंशा के खिलाफ है。
कानूनी सहायता व जानकारी:
यदि किसी व्यक्ति को पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है, तो उसके पास संविधान के तहत निम्नलिखित अधिकार हैं:
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- बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus): इसके जरिए उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस को हिरासत में रखे गए व्यक्ति को अदालत के सामने पेश करने का आदेश दिया जा सकता है。
- 24 घंटे का नियम: सीआरपीसी (CrPC) / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत, पुलिस को किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर (यात्रा के समय को छोड़कर) मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है。
अपने किसी परिचित या मामले से जुड़े अदालती आदेश की प्रमाणित प्रति या स्टेटस चेक करने के लिए आपका उपयोग कर सकते हैं।
इंपोर्टेंट मीटिंग चल रही है, कृपया डिस्टर्ब न करें. pic.twitter.com/fozAwmiy2U
— Neha Singh Rathore (@nehafolksinger) June 9, 2026


