ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासन समिति ने जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन गौतमबुद्ध नगर के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज कुमार भाटी का वकालत का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। समिति ने अपने आदेश में उनकी तीन वर्षीय एलएलबी डिग्री को पूरी तरह अमान्य और अवैध करार दिया है।
समिति के अनुसार, मनोज भाटी 22 फरवरी 1991 से 30 अप्रैल 2009 तक भारतीय वायुसेना में सेवारत रहे। सेवा के दौरान उन्होंने विभाग की अनुमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र के बिना उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद से पत्राचार के माध्यम से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसी आधार पर उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से संबद्ध जनहित कॉलेज ऑफ लॉ, ग्रेटर नोएडा में एलएलबी में प्रवेश लिया। बार काउंसिल ने इसे अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35 के तहत कदाचार माना है।
यह मामला वीरेंद्र सिंह की शिकायत पर आधारित था, जिसमें उन्होंने शपथपत्र समेत आरोप लगाए थे। आदेश की सत्यापित प्रति यूपी बार काउंसिल के सचिव के पत्र के साथ संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है।
लाइसेंस निरस्त होने के बाद मनोज भाटी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर नहीं रह सकते। इस स्थिति में उपाध्यक्ष छत्रपाल सिंह को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
मनोज भाटी ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि शिकायत अनुशासन समिति के संज्ञान योग्य नहीं है और उनके खिलाफ कोई व्यावसायिक कदाचार का आरोप नहीं बनता। उन्होंने कहा कि वे जल्द अपना पक्ष रखेंगे।
इस फैसले के बाद जिला बार के अधिवक्ताओं के बीच चर्चा तेज हो गई है।
गौतमबुद्ध नगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी का लाइसेंस निरस्त
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