लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) के दौरान वोटर्स लिस्ट में जोड़े गए करीब 16.18 लाख वोटरों के नाम और डिटेल्स सार्वजनिक नहीं किए गए। द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की एक जांच रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने फाइनल लिस्ट में कुल 84.3 लाख नए वोटर जोड़े। लेकिन यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर सिर्फ 71.38 लाख Form-6 आवेदनों के डिटेल्स दिखाए गए। यानी लगभग 12.92 लाख वोटर अतिरिक्त जोड़े गए, जिनके आवेदन का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 16.18 लाख वोटरों के नाम ड्राफ्ट रोल जारी होने से पहले ही जोड़ दिए गए थे। जांच में दावा किया गया है कि इन आवेदनों के नाम, पता और बूथ-वार ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया, जबकि कानून के मुताबिक Form-6 आवेदनों की सूची सार्वजनिक करनी जरूरी है।
क्या कहता है यूपी CEO का जवाब?
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इस रिपोर्ट को गलत और गलत धारणाओं पर आधारित बताते हुए साफ खंडन किया है।
CEO कार्यालय के बयान में कहा गया है कि ये 16.18 लाख Form-6 ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने से पहले (27 अक्टूबर 2025 से 6 जनवरी 2026 तक) बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर इकट्ठा किए गए थे। ये उन पात्र नागरिकों के थे जिनके नाम 27 अक्टूबर 2025 को मौजूद वोटर लिस्ट में नहीं थे।
बयान में आगे कहा गया है कि नियमों के अनुसार सिर्फ ड्राफ्ट रोल के बाद आए Form-6 आवेदनों को ही सार्वजनिक दावों की सूची (Form-9) में शामिल किया जाता है। इसलिए किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चली है।
क्या है पूरा विवाद?
रिपोर्ट का दावा: 16.18 लाख वोटरों के नाम छिपाए गए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
आधिकारिक जवाब: ये फॉर्म ड्राफ्ट से पहले इकट्ठे किए गए थे और नियमों के हिसाब से उनके डिटेल्स सार्वजनिक करना जरूरी नहीं था।
उत्तर प्रदेश वोटर लिस्ट में 16.18 लाख ‘रहस्यमय’ वोटर? रिपोर्ट में बड़ा दावा ?
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