*वजूद का चौथा स्तंभ: नकली पनीर पर योगी सरकार का सख्त बैन
एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध, मिलावटखोरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई और खबर का असर*
लखनऊ । योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश में नकली और एनालॉग पनीर, घी, खोया समेत सभी दुग्ध उत्पादों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) के आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने 15 अगस्त को जारी आदेश में एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर राज्यव्यापी प्रतिबंध लगा दिया है। अब दूध के बजाय वनस्पति तेल, पामोलिन, सोया या अन्य गैर-दूध सामग्री से बने नकली पनीर-घी-खोया को ‘डेयरी प्रोडक्ट’ बताकर बेचना पूरी तरह अवैध हो गया है।
आदेश के मुताबिक, अगर किसी इकाई में हानिकारक रसायन, विजातीय वसा, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड या हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे पदार्थ पाए गए तो मौके पर मौजूद पूरा स्टॉक जब्त कर नष्ट कर दिया जाएगा। इकाई पर आपातकालीन प्रतिबंध आदेश जारी कर संचालन तुरंत बंद कराया जा सकेगा। लाइसेंस निलंबित या रद्द करने के साथ FIR भी दर्ज की जाएगी। बाहर राज्य से आने वाले ब्रांड पर भी प्रदेशव्यापी बिक्री प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
हालिया कार्रवाई के आंकड़े
गाजियाबाद, मथुरा और सहारनपुर में 24 विशेष टीमों ने 25 विनिर्माण इकाइयों पर छापेमारी की। अभियान में 7,686 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट की गई, जबकि 2,131 किलोग्राम अतिरिक्त सामग्री और मिलावट वाले पदार्थ जब्त किए गए। कई जगह औद्योगिक रसायन और पामोलिन ऑयल का इस्तेमाल सामने आया। पांच-छह FIR दर्ज की गईं। अलीगढ़ में 1,664 किलोग्राम असुरक्षित पनीर (करीब 5 लाख रुपये का) जब्त कर नष्ट किया गया।
क्यों जरूरी था यह कदम?
नकली पनीर सिर्फ धोखा नहीं, स्वास्थ्य के लिए जहर है। कई फैक्ट्रियों में डिटर्जेंट, औद्योगिक रसायन और सस्ते वनस्पति तेल मिलाकर रबर जैसा पनीर बनाया जा रहा था, जो लीवर, किडनी और हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकता है। त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने पर मिलावट चरम पर पहुंच जाती है। असली दूध उत्पादकों और ईमानदार डेयरी इकाइयों को भी नुकसान हो रहा था। सरकार का मानना है कि जनता के स्वास्थ्य की रक्षा और खाद्य सुरक्षा मानकों को लागू करने के लिए सख्ती अपरिहार्य थी।
खबर का असर
हमारे अखबार में इस खबर के प्रकाशित होने के बाद बाजार में असली पनीर की मांग बढ़ने की उम्मीद जगी है। होटल-रेस्तरां और ढाबों को अब सस्ते नकली पनीर का सहारा छोड़ना पड़ेगा। उपभोक्ताओं को थोड़ी महंगाई का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत होगी। मिलावटखोर इकाइयां या तो बंद होंगी या मानकों पर आना पड़ेगा। खाद्य विभाग की नियमित छापेमारी जारी रहेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सख्ती बनी रही तो नकली पनीर का कारोबार धीरे-धीरे खत्म हो सकता है और प्रदेश में शुद्ध दुग्ध उत्पादों का बाजार मजबूत होगा।
(समाचार स्रोत: FSDA आदेश एवं हालिया छापेमारी रिपोर्ट्स पर आधारित)



