भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से कीऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और आर.टी.आई. एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमले करते हैं.

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भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शुक्रवार को कोर्ट में एक ऐसी बात कही जो चर्चा में आ गई है। एक वकील के मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की और कहा कि ऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और आर.टी.आई. एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमले करते हैं. सीजेआई की टिप्पणी बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह कहा, लगातार कोर्ट की क्रेडिबिलिटी गिर रही है। यह भाषा ऐसी लग रही है, जैसे सरकार बोलती है जो लोग आवाज उठाते हैं, वे एंटी नेशनलिस्ट हैं, अर्बन नक्सल हैं। मुझे लगता है कि उसी भाषा को पैराफ्रेज करके इन्होंने सोचा मैं किस भाषा का इस्तेमाल करूं, तो ऐसा बोल दिया। उन्होंने ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया, लेकिन उन्हें शायद यह पता नहीं है कि कॉकरोच आसानी से मरता नहीं है, वह हर परिस्थिति में खुद को ढाल लेता है। ये वे लोग हैं जो संविधान की लड़ाई लड़ रहे हैं..तीन तीन साल पहले जिन बच्चियों का रेप हुआ था, उन्हें फास्ट ट्रेक कोर्ट होने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। हमारे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एक्टिविस्ट के खिलाफ बोल रहे हैं। देश का, कोर्ट का मज़ाक बना दिया है।यह बयान देश के सर्वाेच्च न्यायालय के सर्वाेच्च न्यायाधीश का है।
जहाँ युवाओं को न्याय, संवेदना और उम्मीद मिलनी चाहिए थी, वहाँ उन्हें ‘कॉकरोच’ जैसी उपमा दी जा रही है। दुखद ही नहीं लोकतंत्र के लिए चेतावनी है।सही कह रहे हैं My Lord, इस देश का युवा कॉकरोच है। क्या करे? रोजगार नहीं है, शिक्षा के अवसर नहीं हैं। पीएम रील बनाने को पकौड़ा तलने को रोजगार समझता है।फिर भी सीजेआई महोदय आपने जो कहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं इस देश के युवाओं के आत्मसम्मान पर एक बड़ी चोट है। सीजेआई सूर्यकांत ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को कहा कि समाज के पैरासाइट पहले से ही सिस्टम पर हमला कर रहे हैं और आप उनके साथ हाथ मिलाना चाहते हैं? वह बोले ऐसे युवा हैं जो कॉकरोच की तरह हैं, जिन्हें नौकरी नहीं मिलती और पेशे में कोई जगह नहीं है। उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया, कुछ आरटीआई एक्टिविस्ट, कुछ अन्य एक्टिविस्ट बन जाते हैं और हर किसी पर हमला शुरू कर देते हैं।सीजेआई ने इसी मामले में कहा। मैं कुछ मामले का इंतजार कर रहा हूं.मैं दिल्ली के ज्यादातर लोगों की एल.एल.बी डिग्रियों की जांच सीबीआई से करवाना चाहता हूं। हजारों ऐसे फर्जी लोग हैं जो काले कोट पहने घूम रहे हैं। मुझे उनकी डिग्रियों की सच्चाई पर गंभीर संदेह है। शायद सीबीआई को कुछ करना पड़ेगा।
एक ऐसे वक्त में जब देश में रोजगार के अवसर लगभग खत्म हो गए हैं। पांच किलो अनाज पर देश की एक बड़ी आबादी निर्भर है। भारतीय रुपए का अवमूल्यन हो रहा है। सरकार अभिव्यक्ति की हर आवाज को कुचलने में लगी है। आम आदमी के मताधिकार को न्यायालय की छत्र छाया में छीना जा रहा है।अगर सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस ऐसी भाषा का इस्तेमाल करता है तो वह बेहद दुखद है और परेशान करने वाली है।संविधान की रक्षा करने वाले और न्याय के सर्वाेच्च पद पर बैठे व्यक्ति का ऐसा बयान बेहद शर्मनाक है। युवाओं की बेरोज़गारी और संघर्ष की तुलना कॉकरोच से करना संवेदनशीलता की सारी हदें पार करता है। ऐसे गरिमामयी पद पर बैठकर इस तरह की घटिया भाषा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जा सकती।आज जबकि भारत की आम जनता,युवा, बेरोजगार न्याय के लिए संदेहपूर्ण भाव से देष के उच्च न्यायालय की ओर देख रहा है उस समय दिल्ली की हाईकोर्ट की जज पर उठते सवालों के विरूद्ध जस्टिस द्वारा राजनीतिक दावपेंचो को प्रयोग करने के बीच उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायधीश द्वारा सार्वजनिक प से देष के युवाओं पर ऐसी टिप्पणी बेहद निराशजनक है। टिप्पणी के बीच में मीडिया की तुलना ‘कॉकरोच’ से करना बेहद दर्दनाक कथन है।हालांकी आज सीजेआई ने अपनी टिप्पणी पर सफाई दी है।

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