गाजियाबाद पुलिस की तानाशाही! फरियाद लेकर गए पत्रकारों पर ही टूट पड़ी खाकी

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इंसाफ़ के लिए ‘एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन ट्रस्ट’ की अध्यक्ष अपूर्वा चौधरी का बड़ा ऐलान;  पुलिस आयुक्त को सौंपेंगी ज्ञापन, 3 दिवसीय भूख हड़ताल शुरू

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से खाकी को शर्मसार करने वाली एक बेहद गंभीर और विचलित करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के थाना विजयनगर और सिद्धार्थ विहार पुलिस चौकी पर एक शिकायत के सिलसिले में गए पत्रकार साथियों के साथ अमर्यादित व्यवहार, अभद्रता, गाली-गलौज और बर्बरतापूर्वक मारपीट करने का सनसनीखेज आरोप लगा है। इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ ‘एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन ट्रस्ट’ की राष्ट्रीय अध्यक्ष अपूर्वा चौधरी ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आज यानी 21 मई को पीड़ित पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करेगा, जिसके साथ ही अध्यक्ष अपूर्वा चौधरी 3 दिनों के अन्न-जल त्यागी भूख हड़ताल पर बैठ रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूरा मामला तब शुरू हुआ जब महिला पत्रकार सुमन मिश्रा के साथ किसी व्यक्ति द्वारा की गई अभद्रता की लिखित शिकायत थाना विजयनगर में दी गई थी। थाना प्रभारी ने मामले की जाँच सिद्धार्थ विहार चौकी प्रभारी को सौंपी थी। आरोप है कि जब चौकी प्रभारी के बुलावे पर पत्रकार संगठन के पदाधिकारी और साथी वहाँ पहुँचे, तो पुलिस की मौजूदगी में ही विपक्षी दल (जिसमें महिलाएं और पुरुष शामिल थे) पत्रकारों पर दबाव बनाने लगे और गाली-गलौज व मारपीट पर उतारू हो गए।
विपक्षियों को कानून का पाठ पढ़ाने के बजाय, वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों ने उल्टा पत्रकारों के साथ ही बदतमीजी शुरू कर दी।
पीड़ित पक्ष द्वारा आलाधिकारियों को भेजे गए शिकायती पत्र के अनुसार, उत्पीड़न की हदें तब पार हो गईं जब ‘भारत का बदलता शासन’ के संपादक ललित चौधरी के साथ सब-इंस्पेक्टर (SI) आयुष कुमार ने बेहद अमर्यादित और असंसदीय व्यवहार किया। आरोप है कि ललित चौधरी को जबरन धक्के देकर पुलिस जीप में बैठाया गया और जीप के भीतर SI आयुष कुमार तथा 3-4 अन्य पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। इस दौरान बेहद आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें हवालात में बंद करने की धमकी दी गई।
जब संस्था के अन्य पत्रकार साथी शिकायत लेकर विजयनगर थाना प्रभारी के पास पहुँचे, तो उन्होंने पीड़ितों की बात सुनने के बजाय उन्हें ही धमकाना शुरू कर दिया। यहाँ तक कि यह कहकर उन्हें दफ्तर से बाहर निकाल दिया कि “अंदर मेरे मेहमान बैठे हैं, आप लोग बाहर रहें।” इस तानाशाही रवैये से क्षुब्ध होकर पत्रकार संगठन को थाने के बाहर ही धरने पर बैठने को मजबूर होना पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब पीड़ितों द्वारा पुलिस आयुक्त (कमिश्नर), डीसीपी (DCP) और एसीपी (ACP) को फोन पर इस बर्बरता की सूचना दी गई, तब जाकर करीब 1 घंटे बाद थाना प्रभारी बाहर आए और पीड़ितों का पक्ष सुना।
‘एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन ट्रस्ट’ की अध्यक्ष अपूर्वा चौधरी ने गहरा आक्रोश और क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा: “हम कोई अपराधी नहीं हैं, बल्कि ईमानदारी से समाज को आईना दिखाने वाले पत्रकार हैं। इस घटना ने मीडिया जगत के मान-सम्मान को गहरी ठेस पहुँचाई है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की तत्काल उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जाँच कराई जाए। यदि कोई पत्रकार दोषी है तो उस पर कार्रवाई हो, अन्यथा पत्रकार ललित चौधरी के साथ मारपीट करने वाले SI आयुष कुमार और अन्य दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर उन पर मुकदमा दर्ज किया जाए।
अपूर्वा चौधरी ने साफ तौर पर ऐलान किया है कि वह आज (21 मई) से पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर बिना अन्न और जल के 3 दिनों के लिए भूख हड़ताल (अनशन) पर बैठ रही हैं। उन्होंने प्रशासन को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस घोर अपमान के बाद भी न्याय नहीं मिला, तो वह अपने परिवार सहित आत्महत्या करने को विवश होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी गाजियाबाद पुलिस प्रशासन की होगी।
इस घटना के बाद से गाजियाबाद और दिल्ली-एनसीआर के पत्रकार संगठनों में भारी रोष व्याप्त है और सभी एक सुर में दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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