आवाज़ बता रही है कि कुर्सी पर बैठकर जनता को नज़रअंदाज़ करना आसान है, लेकिन जनता के सवालों से नज़रें चुराना इतना आसान नहीं

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सत्ता के नशे में इतने भी अंधे न हो जाएं कि जनता का दर्द आपको ड्रामा लगने लगे।
जंतर-मंतर पर उठ रही आवाज़ें हमें बता रही हैं कि सत्ता की कुर्सी पर बैठकर जनता को नज़रअंदाज़ करना तो आसान है, लेकिन जनता के सवालों से बचना उतना आसान नहीं है!

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